लफ़्ज़ ग़ुंचे की तरह!

अब इन दिनों मेरी ग़ज़ल ख़ुशबू की इक तस्वीर है,
हर लफ़्ज़ ग़ुंचे की तरह खिल कर तिरा चेहरा हुआ|

बशीर बद्र

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