हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं,
वो ग़ैर की बाँहों में आराम से सोते हैं।
हसरत जयपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं,
वो ग़ैर की बाँहों में आराम से सोते हैं।
हसरत जयपुरी
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