वरक़ पलटता हूँ मैं जो!

गुज़र गया वक़्त दिल पे लिख कर न जाने कैसी अजीब बातें,
वरक़ पलटता हूँ मैं जो दिल के तो सादगी अब कहीं नहीं है|

जावेद अख़्तर

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