रात के तारों का हुजूम!

सेहन-ए-ज़िंदाँ में है फिर रात के तारों का हुजूम,
शम्अ’ की तरह फ़रोज़ाँ सर-ए-दीवार आँखें|

अली सरदार जाफ़री

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