तेज़ हवाएँ आँखों में !

तेज़ हवाएँ आँखों में तो रेत दुखों की भर ही गईं,
जलते लम्हे रफ़्ता रफ़्ता दिल को भी झुलसाएँगे|

बशर नवाज़

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