गूँज रही हैं पल पल में!

आज पता क्या कौन से लम्हे कौन सा तूफ़ाँ जाग उठे,
जाने कितनी दर्द की सदियाँ गूँज रही हैं पल पल में|

जाँ निसार अख़्तर

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