हैं उतनी तेज़ हवाएँ!

ख़ुदा का शुक्र कि मेरा मकाँ सलामत है,
हैं उतनी तेज़ हवाएँ कि बस्तियाँ उड़ जाएँ|

राहत इंदौरी

Leave a comment