आग के इक क़लम की सियाही लगा,
जो धुआँ ‘नूर’ गंगा किनारे उठा|
कृष्ण बिहारी नूर
A sky full of cotton beads like clouds
आग के इक क़लम की सियाही लगा,
जो धुआँ ‘नूर’ गंगा किनारे उठा|
कृष्ण बिहारी नूर
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