आज एक गीत, कविता और कवियों को लेकर-
तुम इनसे क्या बात करोगे।

तुम पूरे साधारण जन हो,
ये हैं काव्य-जगत के नायक,
अपने अपने दड़बों के ये
विश्व विजेता महिमा गायक,
इनकी पहुंच कहाँ तक प्यारे
कैसे तहकीकात करोगे।
जुड़े हुए इस या उस दल से
नारे जैसी कविता लिखते
एक तरफ सारे गुण इनको
और कहीं अवगुण ही दिखते
कविता अब प्रचार माध्यम है
कैसे सृजन प्रभात करोगे।
मैंने नहीं चुना कविता में
इसको या उसको गाली दूं,
राजनीति की परिधि अलग है
उसको क्यों कविता पर लादूं
राजनीति के राजरोग से
कैसे बचकर बात करोगे।
कविता मन-उपवन का फल है
इसको नहीं प्रदूषित करना,
जहाँ नहीं शामिल हो मन से
वहाँ इसे भी मत ले चलना,
कलाकार तो बने प्रेरणा
नेता से क्या प्राप्त करोगे।
वह तो मन की दुनिया होती
जिसमें कविता विचरण करती,
मन के भावों को समझें तो
नाप सकें हम सारी धरती,
दलगत राजनीति में फंसकर
कविता के संग घात करोगे।
आज के लिए इतना ही,
धन्यवाद ।
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