इंतिज़ार करते रहे!

वो दिन कि कोई भी जब वज्ह-ए-इन्तिज़ार न थी,
हम उन में तेरा सिवा इंतिज़ार करते रहे|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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