राह-ए-वफ़ा में !

राह-ए-वफ़ा में फूल नहीं हैं ख़ार बहुत हैं ‘हस्ती’ जी,
प्यार का दुश्मन सारा ज़माना पहले भी था आज भी है|

हस्तीमल हस्ती

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