आशियाँ जल गया!

आशियाँ जल गया, गुल्सिताँ लुट गया, हम क़फ़स से निकल कर किधर जाएँगे,
इतने मानूस सय्याद से हो गए, अब रिहाई मिलेगी तो मर जाएँगे|

राज़ इलाहाबादी

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