वो दुश्मन क्यूँ न हो!

मिरी कमज़ोरियों पर जब कोई तन्क़ीद करता है,
वो दुश्मन क्यूँ न हो उस से मोहब्बत और बढ़ती है|

नवाज़ देवबंदी

One response to “वो दुश्मन क्यूँ न हो!”

  1. वाह्ह्हह्ह्ह्ह 👌

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