क़ल्ब ओ ज़मीर बे-हिस ओ बे-जान हो गए,
दुनिया ख़ुलूस ओ दर्द से महरूम हो गई|
असद भोपाली
A sky full of cotton beads like clouds
क़ल्ब ओ ज़मीर बे-हिस ओ बे-जान हो गए,
दुनिया ख़ुलूस ओ दर्द से महरूम हो गई|
असद भोपाली
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