तुमसे गर नहीं मिलना!

तो क्या ये तय है कि अब ‘उम्र भर नहीं मिलना,
तो फिर ये ‘उम्र भी क्यों तुम से गर नहीं मिलना|

सुरूर बाराबंकवी

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