तारों के ख़ज़ाने ढूँढे है!

क्या बात है तेरी बातों की लहजा है कि है जादू कोई,

हर आन फ़ज़ा में दिल उड़ कर तारों के ख़ज़ाने ढूँढे है|

ताज भोपाली

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