गीतों की फ़ज़ाएँ माँगे!

दिल तेरी नज़र की शह पा कर मिलने के बहाने ढूँढे है,
गीतों की फ़ज़ाएँ माँगे है ग़ज़लों के ज़माने ढूँढे है|

ताज भोपाली

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