शहीद-ए-यास हूँ!

शहीद-ए-यास हूँ रुस्वा हूँ नाकामी के हाथों से,
जिगर का चाक बढ़ कर आ गया है मेरे दामन में|

चकबस्त बृज नारायण

Leave a comment