ज़माने में नहीं अहल-ए-हुनर का क़द्र-दाँ बाक़ी,
नहीं तो सैकड़ों मोती हैं इस दरिया के दामन में|
चकबस्त बृज नारायण
A sky full of cotton beads like clouds
ज़माने में नहीं अहल-ए-हुनर का क़द्र-दाँ बाक़ी,
नहीं तो सैकड़ों मोती हैं इस दरिया के दामन में|
चकबस्त बृज नारायण
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