फैल जाएँगे जो तूफ़ाँ !

ये ज़मीं यूँही सिकुड़ती जाएगी और एक दिन,
फैल जाएँगे जो तूफ़ाँ साहिलों में क़ैद हैं|

सलीम कौसर

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