वही है या कोई और है

मिरी रौशनी तिरे ख़द्द-ओ-ख़ाल से मुख़्तलिफ़ तो नहीं मगर,
तू क़रीब आ तुझे देख लूँ तू वही है या कोई और है|

सलीम कौसर

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