मिरे दिल मैं कौन है तू!

मिरे दिल मैं कौन है तू कि हुआ जहाँ अँधेरा,
वहीं सौ दिये जलाए तिरे रुख़ की चाँदनी ने|

मजरूह सुल्तानपुरी

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