कई ख़्वाब देख डाले!

कहीं बे-ख़याल हो कर युंही छू लिया किसी ने,
कई ख़्वाब देख डाले यहाँ मेरी बे-ख़ुदी ने|

मजरूह सुल्तानपुरी

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