अहल-ए-तूफ़ाँ आओ!

अहल-ए-तूफ़ाँ आओ दिल-वालों का अफ़्साना कहें,
मौज को गेसू भँवर को चश्म-ए-जानाना कहें|

मजरूह सुल्तानपुरी

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