तिरी सम्त जाने का रास्ता नहीं हो रहा,
रह-ए-इश्क़ में कोई मो’जिज़ा* नहीं हो रहा|
*करिश्मा
अज़हर इक़बाल
A sky full of cotton beads like clouds
तिरी सम्त जाने का रास्ता नहीं हो रहा,
रह-ए-इश्क़ में कोई मो’जिज़ा* नहीं हो रहा|
*करिश्मा
अज़हर इक़बाल
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