बाँझ हो जाएगी क्या!

राम-ओ-गौतम की ज़मीं हुर्मत-ए-इंसाँ की अमीं,
बाँझ हो जाएगी क्या ख़ून की बरसात के बा’द|

अली सरदार जाफ़री

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