दिन तेरे सोगवारों के!

शुग़्ल-ए-मय-परस्ती गो जश्न-ए-ना-मुरादी था,
यूँ भी कट गए कुछ दिन तेरे सोगवारों के|

साहिर लुधियानवी

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