मुल्क-ए-जवानी है!

ऐ पीर-ए-ख़िरद-मंदाँ दिल की भी ज़रूरत है,
ये शहर-ए-ग़ज़ालाँ है ये मुल्क-ए-जवानी है|

बशीर बद्र

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