वो ख़ुश-लिबास भी!

वो ख़ुश-लिबास भी ख़ुश-दिल भी ख़ुश-अदा भी है,
मगर वो एक है क्यूँ उस से ये गिला भी है|

निदा फ़ाज़ली

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