दुनिया-ए-मोहब्बत!

दुनिया-ए-मोहब्बत में हम से हर अपना पराया छूट गया,
अब क्या है जिस पर नाज़ करें इक दिल था वो भी टूट गया।

शमीम जयपुरी

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