बहुत से शे‘र मुझ से ख़ून थुकवाते हैं आमद पर,
बहुत मुमकिन है मैं एक दिन ग़ज़ल-ख़्वानी से मर जाऊँ|
महशर आफ़रीदी
A sky full of cotton beads like clouds
बहुत से शे‘र मुझ से ख़ून थुकवाते हैं आमद पर,
बहुत मुमकिन है मैं एक दिन ग़ज़ल-ख़्वानी से मर जाऊँ|
महशर आफ़रीदी
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