गए दिनों को बुला रहा!

शिकस्ता-पा राह में खड़ा हूँ गए दिनों को बुला रहा हूँ,
जो क़ाफ़िला मेरा हम-सफ़र था मिसाल-ए-गर्द-ए-सफ़र गया वो|

नासिर काज़मी

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