शिकस्ता-पा राह में खड़ा हूँ गए दिनों को बुला रहा हूँ,
जो क़ाफ़िला मेरा हम-सफ़र था मिसाल-ए-गर्द-ए-सफ़र गया वो|
नासिर काज़मी
A sky full of cotton beads like clouds
शिकस्ता-पा राह में खड़ा हूँ गए दिनों को बुला रहा हूँ,
जो क़ाफ़िला मेरा हम-सफ़र था मिसाल-ए-गर्द-ए-सफ़र गया वो|
नासिर काज़मी
Leave a comment