क्यूँ बे-असर गया वो!

मिरा तू ख़ूँ हो गया है पानी सितमगरों की पलक न भीगी,
जो नाला उट्ठा था रात दिल से न जाने क्यूँ बे-असर गया वो|

नासिर काज़मी

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