याद हो कि न याद हो!

कभी हम में तुम में भी प्यार था तुम्हें याद हो कि न याद हो,
न किसी के दिल में ग़ुबार था तुम्हें याद हो कि न याद हो|

अर्श मलसियानी

Leave a comment