लोग कहते हैं ज़िंदगी!

जिसे लोग कहते हैं ज़िंदगी वो तो हादसों का हुजूम है,

वो तो कहिए मेरा ही काम था कि मैं दरमियाँ से गुज़र गया|

अर्श मलसियानी

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