मैं मुराद-ए-शौक़ को!

मैं मुराद-ए-शौक़ को पा के भी न मुराद-ए-शौक़ को पा सकूँ,
दर-ए-मेहरबाँ पे पहुँच के भी दर-ए-मेहरबाँ से गुज़र गया|

अर्श मलसियानी

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