कभी इस मकाँ से गुज़र गया कभी उस मकाँ से गुज़र गया,
तिरे आस्ताँ की तलाश में मैं हर आस्ताँ से गुज़र गया|
अर्श मलसियानी
A sky full of cotton beads like clouds
कभी इस मकाँ से गुज़र गया कभी उस मकाँ से गुज़र गया,
तिरे आस्ताँ की तलाश में मैं हर आस्ताँ से गुज़र गया|
अर्श मलसियानी
Leave a comment