आस्ताँ से गुज़र गया!

कभी इस मकाँ से गुज़र गया कभी उस मकाँ से गुज़र गया,
तिरे आस्ताँ की तलाश में मैं हर आस्ताँ से गुज़र गया|

अर्श मलसियानी

Leave a comment