न कोई सम्त मुक़र्रर न कोई जा-ए-क़रार,
है इंतिशार* का आलम हवा के बंदों में|
*घबराहट
क़ैसर शमीम
A sky full of cotton beads like clouds
न कोई सम्त मुक़र्रर न कोई जा-ए-क़रार,
है इंतिशार* का आलम हवा के बंदों में|
*घबराहट
क़ैसर शमीम
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