मैं न भूला!

आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामनरेश पाठक जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ।

पाठक जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामनरेश पाठक जी की यह कविता –


मैं न भूला,
है न छूटी राह,
मेरे पास हर दिन तो
नया अर्थ आ लगा है;
इति नहीं जिसकी.

मैं न डूबा,
है न खोया आज तक अस्तित्व.
मेरी भुजाओं में हर दिन
नया बल भर गया है;
रिक्ति नहीं जिसकी.

मैं न ऊबा,
है न छोड़ा अनवरत संघर्ष,
मेरे प्राण में हर दिन नया विश्वास
ही तो आ बसा है;
जय सदा जिसकी.

पंथ में मेरे नहीं विश्राम,
पराजय में भी नहीं विश्वास
संघर्ष ही आदान और प्रदान.
मैं न भूला,
मैं न डूबा,
मैं न ऊबा.

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

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2 responses to “मैं न भूला!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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