धोके में आ जाए तो!

क्यूँ ये मेहर-अंगेज़ तबस्सुम मद्द-ए-नज़र जब कुछ भी नहीं,

हाए कोई अंजान अगर इस धोके में आ जाए तो|

अंदलीब शादानी

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