कैफ़ियत दिल की!

कैफ़ियत दिल की सुनाती हुई एक एक निगाह,
बे-ज़बाँ हो के भी वो माइल-ए-गुफ़्तार आँखें|

अली सरदार जाफ़री

2 responses to “कैफ़ियत दिल की!”

Leave a comment