कोई गर्दिश नहीं थी!

ये आलम देख कर तू ने भी आँखें फेर लीं वर्ना,
कोई गर्दिश नहीं थी गर्दिश-ए-अय्याम से पहले|

क़तील शिफ़ाई

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