रह-ए-ख़िज़ाँ में !

रह-ए-ख़िज़ाँ में तलाश-ए-बहार करते रहे,
शब-ए-सियह से तलब हुस्न-ए-यार करते रहे|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

2 responses to “रह-ए-ख़िज़ाँ में !”

  1. बहुत खूब 👌

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    1. धन्यवाद जी

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