तूफ़ाँ के बा’द मैं भी!

तूफ़ाँ के बा’द मैं भी बहुत टूट सा गया,
दरिया फिर अपने रुख़ पे बहा ले गया मुझे।

कृष्ण बिहारी नूर

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