फ़िरक़े ज़ात लिखूँ!

अपनी अपनी तारीकी को लोग उजाला कहते हैं,
तारीकी के नाम लिखूँ तो क़ौमें फ़िरक़े ज़ात लिखूँ|

जावेद अख़्तर

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