कैसे वो सदमात लिखूँ!

किस किस की आँखों में देखे मैं ने ज़हर बुझे ख़ंजर,
ख़ुद से भी जो मैं ने छुपाए कैसे वो सदमात लिखूँ|

जावेद अख़्तर

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