एक आँख वाला इतिहास!

आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ।

दूधनाथ जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की यह कविता  – 

मैंने कठैती हड्डियों वाला एक हाथ देखा–

रंग में काला और धुन में कठोर ।


मैंने उस हाथ की आत्मा देखी–

साँवली और कोमल

और कथा-कहानियों से भरपूर !


मैंने पत्थरों में खिंचा

सन्नाटा देखा ।

जिसे संस्कृति कहते हैं ।


मैंने एक आँख वाला

इतिहास देखा

जिसे फ़िलहाल सत्य कहते हैं ।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

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