उधर भी ख़ाक उड़ी!

उधर भी ख़ाक उड़ी है इधर भी ख़ाक उड़ी,
जहाँ जहाँ से बहारों के कारवाँ निकले|

साहिर लुधियानवी

One response to “उधर भी ख़ाक उड़ी!”

  1. बहुत खूब 👌

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