मुझ गुमनाम से पूछते हैं फ़रहाद ओ मजनूँ,
इश्क़ में कितना नाम कमाया जा सकता है|
अब्बास ताबिश
A sky full of cotton beads like clouds
मुझ गुमनाम से पूछते हैं फ़रहाद ओ मजनूँ,
इश्क़ में कितना नाम कमाया जा सकता है|
अब्बास ताबिश
Leave a comment