सरगोशी को कान तरसते रहते हैं,
सन्नाटा आवाज़ में ढलता रहता है|
अज़हर इक़बाल
A sky full of cotton beads like clouds
सरगोशी को कान तरसते रहते हैं,
सन्नाटा आवाज़ में ढलता रहता है|
अज़हर इक़बाल
Leave a comment